नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन अमेरिकी शेयर बाज़ार (US Stock Market) के लिए बेहद खराब साबित हुआ। AI की वजह से जो बाज़ार रिकॉर्ड ऊंचाई पर दौड़ रहा था, उस पर अचानक ब्रेक लग गया। वजह? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और उससे पैदा हुई महंगाई की नई चिंता। इसी डर से Wall Street पर बिकवाली हावी हो गई और Dow Jones 500 अंकों से ज़्यादा टूट गया। Investors अब ज़्यादा सतर्क हो गए हैं।
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब बाज़ार पहले से ही Federal Reserve की अगली चाल को लेकर टेंशन में था। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से यह डर और गहरा गया है कि महंगाई काबू में नहीं आ रही। और अगर महंगाई बढ़ेगी, तो ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं — जो stock market के लिए अच्छी खबर नहीं है। सच यही है।
- शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार में भारी गिरावट, Dow Jones 500 अंक से ज़्यादा टूटा।
- कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल से वैश्विक महंगाई (Global Inflation) का डर बढ़ा।
- बढ़ती महंगाई की चिंता के कारण Treasury yields में तेज़ी आई, जिससे stocks कम आकर्षक हो गए।
- AI शेयरों की रिकॉर्ड तोड़ तेज़ी पर लगाम लगी, और बाज़ार में मुनाफावसूली देखने को मिली।
- Energy sector के शेयरों में बढ़त रही, लेकिन बाकी बाज़ार लाल निशान में बंद हुआ।
- Investors Federal Reserve की भविष्य की नीतियों और संभावित ब्याज़ दर बढ़ोतरी को लेकर चिंतित हैं।
महंगाई की आग ने क्यों डराया बाज़ार को?
सोचो ज़रा। कुछ हफ्तों से बाज़ार Artificial Intelligence (AI) के दम पर उड़ान भर रहा था। ऐसा लग रहा था कि यह तेज़ी कभी नहीं रुकेगी। लेकिन शुक्रवार को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सारा खेल बिगाड़ दिया। तेल महंगा होने का सीधा मतलब है कि ट्रांसपोर्टेशन से लेकर सामान बनाने तक, हर चीज़ की लागत बढ़ जाएगी। और जब लागत बढ़ती है, तो कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा देती हैं, जिससे आम जनता के लिए महंगाई बढ़ जाती है।
इसी महंगाई के डर ने investors को बेचैन कर दिया। उन्हें लगा कि अगर महंगाई बढ़ी तो US Federal Reserve ब्याज़ दरें और बढ़ा सकता है ताकि economy को ठंडा किया जा सके। और जब ब्याज़ दरें बढ़ती हैं, तो कंपनियों के लिए loan लेना महंगा हो जाता है और उनका मुनाफा कम हो जाता है। तो, investors ने जोखिम लेने के बजाय अपने पैसे सुरक्षित निकालना बेहतर समझा, जिससे बाज़ार धड़ाम हो गया।
Treasury Yields और Stocks का छत्तीस का आंकड़ा
जब भी market में अनिश्चितता होती है, तो निवेशक सुरक्षित investment की तलाश करते हैं। अमेरिका में सरकारी बांड (Treasury) सबसे सुरक्षित माने जाते हैं। जब महंगाई का डर बढ़ा, तो इन बांड्स पर मिलने वाला return, जिसे yield कहते हैं, भी बढ़ गया। इसका मतलब है कि अब investors को बिना किसी जोखिम के अच्छा-खासा return मिल रहा था।
ऐसे में उन्हें शेयर बाज़ार (equities) में पैसा लगाना घाटे का सौदा लगा, जहाँ जोखिम ज़्यादा होता है। तो उन्होंने क्या किया? उन्होंने शेयरों से पैसा निकालकर सरकारी बांड्स में लगाना शुरू कर दिया। और जब बड़े पैमाने पर शेयरों की बिकवाली होती है, तो market का नीचे आना तय है। यही शुक्रवार को हुआ। AI की चमक Treasury yields की सुरक्षा के आगे फीकी पड़ गई।
Federal Reserve की अगली चाल पर टिकी हैं निगाहें
अमेरिकी बाज़ार की इस गिरावट के पीछे एक और बड़ा कारण है — Federal Reserve के चेयरमैन Jerome Powell और उनकी नीतियां। लंबे समय से इस बात पर बहस चल रही है कि क्या Fed महंगाई को पूरी तरह काबू कर पाया है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई अभी भी उम्मीद से ज़्यादा बनी हुई है (sticky inflation)। अब तेल की कीमतों ने इस चिंता को और हवा दे दी है।
बाज़ार को डर है कि Fed को महंगाई से लड़ने के लिए एक बार फिर ब्याज़ दरें बढ़ाने जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, दुनिया में चल रहे geopolitical तनाव ने भी बाज़ार का मूड खराब किया है। जब भविष्य को लेकर इतनी अनिश्चितता हो, तो कोई भी निवेशक बड़ा दांव खेलने से बचता है। फिलहाल तो सभी की निगाहें Fed की अगली meeting पर टिकी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अमेरिकी बाज़ार में गिरावट का मुख्य कारण क्या था?
देखिए, सबसे बड़ी और तात्कालिक वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। इससे यह डर पैदा हो गया कि महंगाई फिर से सिर उठा सकती है, जिसके कारण investors ने घबराहट में अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए।
Treasury Yields बढ़ने का market पर क्या असर होता है?
सीधी बात है, Treasury yields सरकारी बांड्स पर मिलने वाला सुरक्षित return है। जब यह बढ़ता है, तो निवेशक शेयर बाज़ार के जोखिम से बचते हैं और अपना पैसा बांड्स में लगा देते हैं। इससे शेयरों की बिक्री बढ़ती है और market नीचे आता है।
क्या AI शेयरों की तेज़ी अब खत्म हो गई है?
देखिए, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी। AI शेयरों ने बाज़ार को खूब दौड़ाया है, लेकिन अभी महंगाई जैसी बड़ी चिंता सामने आ गई है। यह गिरावट एक temporary profit-booking भी हो सकती है। लेकिन हाँ, निवेशक अब पहले से ज़्यादा सावधान हो गए हैं।




