गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। ईरान में जारी युद्ध के बीच बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की चिंता ने निवेशकों को डरा दिया है। पिछले चार दिनों में सोना 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गया, जबकि चांदी 15,000 रुपये तक फिसली है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन यह गिरावट धीरे-धीरे कीमती धातुओं में निवेश करने का मौका भी दे रही है।
- पिछले चार सत्रों में सोने की कीमत में 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट।
- ईरान युद्ध, कच्चे तेल के दाम और बढ़ती महंगाई प्रमुख वजह।
- 1990 के खाड़ी युद्ध के विपरीत, ईरान युद्ध में सोने के दाम गिरे हैं।
- विशेषज्ञों की सलाह है कि गिरावट में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं।
- 27 फरवरी, 2026 को सोने का भाव 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 21 मार्च तक 1.47 लाख रुपये पर आ गया।
सोना गिरा, लेकिन इस बार वजह अलग
ईरान में छिड़े युद्ध का असर दुनिया भर के बाजारों पर दिख रहा है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि जब भी दुनिया में कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट आता है, सोना आमतौर पर बढ़ता है, क्योंकि उसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार उलटा हुआ है। भास्कर इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 फरवरी, 2026 को ईरान युद्ध शुरू होने से ठीक पहले भारत में सोना 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था। युद्ध के 22वें दिन, यानी 21 मार्च तक, कीमतें करीब 8% गिरकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गईं।
यह ट्रेंड 1990 के खाड़ी युद्ध से बिलकुल अलग है, जब सोने की कीमतों में शुरुआती चरण में लगभग 20% का उछाल आया था। मुंबई के एक जाने-माने वित्तीय सलाहकार, श्री अविनाश वर्मा कहते हैं, “इस बार बाजार की प्रतिक्रिया थोड़ी अलग है। निवेशक सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव नहीं देख रहे, बल्कि उन्हें महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की भी चिंता है, जिससे डॉलर मज़बूत हो रहा है और सोने पर दबाव पड़ रहा है।” द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, यूएस-इज़राइल-ईरान युद्ध ने $9 ट्रिलियन के सोने के मार्केट कैप को साफ कर दिया है।
क्या खरीदने का सही वक्त आ गया है?
बाजार के जानकार मौजूदा गिरावट को निवेश का अवसर मान रहे हैं। कई विश्लेषक निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे इस गिरावट का फायदा उठाएं और धीरे-धीरे सोना-चांदी खरीदें। मुंबई के Angel One में रिसर्च हेड, श्री अमरेश श्रीवास्तव ने एक बयान में कहा, “यह एक करेक्शन है, पूरी तरह से बाजार का पतन नहीं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है, लेकिन किसी को भी एक साथ बड़ा निवेश नहीं करना चाहिए।”
हालांकि, यह भी सच है कि मौजूदा स्थिति में बहुत ज़्यादा अनिश्चितता है। कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं, जो महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। ऐसे में अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों के लिए सोने के मुकाबले डॉलर में निवेश करना ज़्यादा आकर्षक हो सकता है।
सोने के गिरते दाम और आपकी जेब
इस गिरावट का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो सोने में निवेश करने की सोच रहे थे या जिनकी शादी-ब्याह की तैयारियां चल रही हैं। एक तरफ जहां उपभोक्ता कुछ राहत महसूस कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ जो लोग पहले ही ऊंचे दामों पर सोना खरीद चुके हैं, उन्हें थोड़ा इंतज़ार करना पड़ सकता है। चेन्नई के जौहरी संघ के अध्यक्ष, श्री रामकृष्ण अय्यर कहते हैं, “ग्राहक अभी खरीदारी में थोड़ी हिचकिचाहट दिखा रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कीमतें और गिर सकती हैं। यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, लेकिन त्योहारों के आते ही मांग फिर से बढ़ने की उम्मीद है।” अब सबकी नज़रें Middle East के घटनाक्रम और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अगले फैसलों पर हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सोना क्यों गिर रहा है, जबकि युद्ध में आमतौर पर बढ़ता है?
देखिए, इस बार वजह थोड़ी अलग है। आमतौर पर युद्ध में सोना बढ़ता है, लेकिन इस ईरान युद्ध में बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की चिंता ने डॉलर को मज़बूत किया है, जिससे सोने पर दबाव पड़ा। विशेषज्ञ कहते हैं कि निवेशक अब सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक कारकों को भी देख रहे हैं।
क्या यह सोने में निवेश करने का सही समय है?
सीधी बात यह है कि कई विश्लेषक इसे धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का मौका मान रहे हैं। वे कहते हैं कि मौजूदा गिरावट एक करेक्शन है, न कि पूरी तरह से मंदी। लेकिन आपको एक साथ पूरा निवेश नहीं करना चाहिए, बल्कि चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करनी चाहिए।
सोने की कीमतों पर आगे क्या असर पड़ सकता है?
आगे की कीमतें ईरान युद्ध, कच्चे तेल के वैश्विक दाम और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों पर निर्भर करेंगी। अगर तनाव बढ़ता है और महंगाई नियंत्रण में नहीं आती, तो डॉलर और मज़बूत हो सकता है, जिससे सोने पर दबाव बना रहेगा।




