दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच रिश्ते हमेशा से ही उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। लेकिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के मामले में यह कुछ ज़्यादा ही अप्रत्याशित हो जाता है। हाल ही में उन्होंने भारत और चीन को "hellhole" (नरक जैसी जगह) बताने वाले एक बयान को सोशल मीडिया पर शेयर कर एक नया diplomatic विवाद खड़ा कर दिया है। यह तस्वीर उनके राष्ट्रपति कार्यकाल से बिल्कुल अलग है, जब 2017 में वो चीन गए थे और President Xi Jinping ने उनके लिए पलकें बिछा दी थीं। तब बीजिंग की सड़कों पर भव्य स्वागत हुआ था, और आज उन्हीं देशों के लिए अपमानजनक टिप्पणी। सोचो ज़रा, क्या बदला है?

मुख्य बातें
  • पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत और चीन को "hellhole" कहने वाले एक commentator के बयान को शेयर किया है।
  • इस बयान पर भारत ने भी आपत्ति जताई है और diplomatic circles में काफी हलचल है।
  • यह उनके 2017 के चीन दौरे से एकदम उलट है, जहाँ उन्हें अभूतपूर्व "state visit-plus" सम्मान मिला था।
  • उस दौरे में Trump और Xi Jinping ने व्यापार और North Korea जैसे मुद्दों पर साथ काम करने की कसमें खाई थीं।
  • कैमरे के सामने दोनों नेताओं की दोस्ती देखने लायक थी, लेकिन पर्दे के पीछे कई thorny issues पहले से मौजूद थे।
  • यह घटना Trump की विदेश नीति के अप्रत्याशित और अक्सर विरोधाभासी स्वभाव को उजागर करती है।

जब Beijing में बिछा था रेड कार्पेट

नवंबर 2017 का वो नज़ारा आज भी कई लोगों को याद है। Donald Trump जब बतौर राष्ट्रपति चीन पहुँचे, तो उनका ऐसा स्वागत हुआ जो शायद ही किसी अमेरिकी नेता का हुआ हो। President Xi Jinping ने इसे सिर्फ एक 'state visit' नहीं, बल्कि 'state visit-plus' का दर्जा दिया। इसका मतलब था—शाही सम्मान और व्यक्तिगत ध्यान। Trump और उनकी पत्नी Melania को मशहूर Forbidden City में ठहराया गया, जहाँ उनके लिए एक खास डिनर का आयोजन किया गया। यह बहुत बड़ी बात थी। दोनों नेता मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवा रहे थे और एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांध रहे थे। उस समय ऐसा लगा मानो अमेरिका और चीन के बीच सारे मतभेद खत्म हो गए हैं और एक नई दोस्ती की शुरुआत हो रही है। और इस दोस्ती का मकसद व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना और North Korea के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाना बताया गया।

मुस्कुराहटों के पीछे छिपे कांटे

लेकिन वो दोस्ती की तस्वीरें पूरी सच्चाई नहीं थीं। सच तो यह है कि उस भव्य स्वागत और मुस्कुराहटों के पीछे कई गंभीर और कांटेदार मुद्दे छिपे हुए थे, जिन पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद थे। सबसे बड़ा मुद्दा था व्यापार घाटा (trade deficit) — अमेरिका चीन से जितना खरीदता था, उतना बेच नहीं पाता था, और Trump इसे लेकर लगातार शिकायत कर रहे थे। इसके अलावा, South China Sea में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और बौद्धिक संपदा की चोरी जैसे मसले भी थे। तो, कैमरे पर जो दिख रहा था, वो बस एक diplomatic दिखावा था। असल में, दोनों ही देश अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। और यह दोस्ती ज़्यादा दिन नहीं चली। कुछ ही महीनों बाद, Trump ने चीन के खिलाफ एक बड़ा trade war छेड़ दिया, जिसने पूरी दुनिया की economy को हिलाकर रख दिया।

'Hellhole' बयान और आज की हकीकत

अब आते हैं आज की हकीकत पर। Trump अब राष्ट्रपति नहीं हैं, लेकिन वो 2024 में वापसी की तैयारी कर रहे हैं। और इसी तैयारी के बीच उन्होंने एक ऐसा बयान शेयर किया है, जिसने उनके पुराने दोस्तों और दुश्मनों, दोनों को चौंका दिया है। एक commentator के वीडियो को शेयर करना जिसमें अमेरिका के दो सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों, भारत और चीन, को "hellhole" कहा गया हो, उनकी आक्रामक राजनीति का नया उदाहरण है। भारत, जो अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी है, ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यह दिखाता है कि Trump के लिए diplomatic रिश्ते कितने मायने रखते हैं। उनकी नीति सीधी है — जो उनके एजेंडे में फिट बैठे, वो दोस्त, और जो न बैठे, वो दुश्मन। यह बयान सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर Trump वापस सत्ता में आए, तो दुनिया को उनकी अप्रत्याशित और विस्फोटक विदेश नीति के लिए फिर से तैयार रहना होगा। कल के दोस्त आज दुश्मन बन सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Trump ने असल में भारत और चीन के बारे में क्या कहा?

सीधी बात, Trump ने खुद ये शब्द नहीं कहे। उन्होंने एक conservative commentator का वीडियो शेयर किया जिसमें जन्मसिद्ध नागरिकता की आलोचना करते हुए कहा गया था कि लोग "hellhole" जैसी जगहों (भारत और चीन का नाम लेकर) से अमेरिका आते हैं। Trump का इसे शेयर करना इस विचार का समर्थन माना जा रहा है।

2017 में China में Trump का स्वागत इतना खास क्यों था?

देखिए, President Xi Jinping उस समय Trump के साथ एक व्यक्तिगत रिश्ता बनाना चाहते थे। उन्हें लगा कि भव्य स्वागत और तारीफों से वो Trump को मना लेंगे और trade war जैसे अमेरिकी कदमों से बच जाएँगे। इसलिए उन्होंने Trump को अब तक का सबसे बड़ा सम्मान दिया, जिसे "state visit-plus" कहा गया।

इस नए बयान का global politics पर क्या असर होगा?

इसका असर गहरा है। यह दिखाता है कि Trump की नज़र में देशों के साथ रिश्ते स्थायी नहीं हैं। वो सहयोगियों को भी निशाना बना सकते हैं। अगर वो दोबारा चुनाव जीतते हैं, तो भारत जैसे देशों को अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को लेकर फिर से सोचना पड़ सकता है, क्योंकि Trump की नीतियां भरोसे पर नहीं, बल्कि सिर्फ 'America First' पर चलती हैं।