BRICS देशों ने मंगलवार को गुवाहाटी घोषणा को अपनाया, जिसमें ड्रग तस्करी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई। यह फैसला सिर्फ नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों को भी छूता है। यह घोषणा ऐसे वक्त में आई है जब दुनिया भर में ड्रग्स एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और आदिवासी समुदाय अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
- BRICS देशों ने गुवाहाटी घोषणा को अपनाया।
- यह घोषणा ड्रग तस्करी के खिलाफ सहयोग मज़बूत करने पर केंद्रित है।
- घोषणा में स्वदेशी समुदायों के संवैधानिक सुरक्षा उपायों, खासकर 6वीं अनुसूची के पूर्ण कार्यान्वयन की बात कही गई है।
- BRICS देश सूचना साझा करने और ऑपरेशनल सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
- यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ड्रग नेटवर्क और आदिवासी अधिकारों पर बहस तेज़ है।
BRICS की साझा लड़ाई: ड्रग तस्करी और मानव तस्करी पर नकेल
BRICS देशों – ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – ने गुवाहाटी में मिलकर एक बड़े कदम का ऐलान किया है। इस घोषणा का मुख्य मक़सद अवैध ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत करना है। यह सिर्फ कागज़ी कार्यवाही नहीं है, बल्कि एक ठोस योजना है जिसमें सदस्य देश अपनी खुफिया जानकारी साझा करेंगे और ऑपरेशनल सहयोग बढ़ाएंगे। सोचो ज़रा, जब दुनिया की इतनी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एक साथ आएं, तो इसका असर कितना बड़ा होगा। UNODC (संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और अपराध कार्यालय) के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक ड्रग मार्केट हर साल अरबों डॉलर का है, और इसका सीधा असर देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। BRICS के इस कदम से इस नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी, खासकर मानव तस्करी जैसे अपराधों को भी रोका जा सकेगा जो अक्सर ड्रग्स से जुड़े होते हैं।
आदिवासी अधिकार और 6वीं अनुसूची: एक संवेदनशील पहलू
लेकिन इस घोषणा में सिर्फ ड्रग्स की बात नहीं है। इसमें भारत के संदर्भ में एक और बेहद ज़रूरी मुद्दा उठाया गया है: स्वदेशी समुदायों के अधिकार। गुवाहाटी घोषणा में आदिवासी समुदायों के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों, खासकर 6वीं अनुसूची के पूर्ण कार्यान्वयन का आह्वान किया गया है। यह बड़ी बात है। असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे राज्यों में, 6वीं अनुसूची आदिवासी आबादी को स्वायत्त ज़िला परिषदों (Autonomous District Councils) के ज़रिए शासन और भूमि पर अधिकार देती है। अगर आप मणिपुर या नागालैंड जैसे राज्यों की ज़मीनी स्थिति देखें, तो पता चलता है कि ज़मीन और संसाधनों पर अधिकार हमेशा एक संवेदनशील मसला रहा है। बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं के कारण अक्सर इन समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन होता है। इस घोषणा में इस बात को उठाना, BRICS मंच पर एक अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति जैसा है कि इन अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।
आगे की राह: BRICS का बढ़ता प्रभाव और भारत की भूमिका
यह गुवाहाटी घोषणा BRICS देशों के बीच बढ़ते सहयोग का एक और सबूत है। पहले ये देश सिर्फ आर्थिक मुद्दों पर बात करते थे, लेकिन अब सुरक्षा, सामाजिक न्याय और मानवाधिकार जैसे अहम विषयों पर भी इनकी राय अहम हो रही है। भारत के लिए यह घोषणा दोहरी सफलता है। एक तरफ, यह देश में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत करेगा, जो सीमावर्ती राज्यों के लिए एक बड़ी चुनौती है। दूसरी तरफ, यह भारत के भीतर आदिवासी अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मज़बूत आवाज़ देता है। अब सबकी नज़रें इस बात पर होंगी कि इन संकल्पों को ज़मीन पर कितनी गंभीरता से उतारा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुवाहाटी घोषणा क्या है?
देखिए, गुवाहाटी घोषणा BRICS देशों द्वारा अपनाया गया एक दस्तावेज़ है। इसमें मुख्य रूप से अवैध ड्रग तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मज़बूत करने पर सहमति जताई गई है। साथ ही, इसमें भारत के स्वदेशी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों, खासकर 6वीं अनुसूची के पूर्ण कार्यान्वयन पर भी ज़ोर दिया गया है।
BRICS देश ड्रग तस्करी से कैसे लड़ेंगे?
सीधी बात यह है कि BRICS देश सूचना साझाकरण और ऑपरेशनल सहयोग बढ़ाएंगे। इसका मतलब है कि वे एक-दूसरे को ड्रग नेटवर्क और तस्करों के बारे में जानकारी देंगे, और सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए मिलकर काम करेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित प्रयास होगा।
गुवाहाटी घोषणा आदिवासी अधिकारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर आदिवासी अधिकारों के मुद्दे को उठाता है। घोषणा में भारत की 6वीं अनुसूची का उल्लेख है, जो पूर्वोत्तर राज्यों में आदिवासी समुदायों को विशेष अधिकार देती है। इसका मतलब है कि BRICS देश भी मानते हैं कि इन अधिकारों का सम्मान होना चाहिए, खासकर बड़े विकास परियोजनाओं के दौरान।




