ऑपरेशन सिंदूर ने सीमापार आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने से कहीं अधिक किया है — इसने भारत के अपने देश में बने रक्षा हथियारों की जंग की तैयारी के बारे में स्पष्ट संदेश दिया है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने प्रयागराज में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में इस बात को जोर देकर कहा कि यह ऑपरेशन साबित करता है कि भारत के स्वदेशी हथियार प्रणालियां अब केवल सपने नहीं रह गई हैं, बल्कि वास्तविक लड़ाई में परखे हुए सत्य हैं। एक ऐसे देश के लिए जो दशकों तक अपने सैन्य उपकरणों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण बयान है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली के लिए क्यों एक मोड़ बन गया
पिछले पचास सालों में भारत दुनिया के शीर्ष तीन हथियार आयातकों में रहा है। यह निर्भरता केवल बजट की समस्या नहीं थी — यह सामरिक कमजोरी भी थी। हर विदेशी हथियार के साथ शर्तें आती थीं: तकनीकी पाबंदियां, डिलीवरी में देरी, और यह खतरा कि संकट के समय कल-पुर्जों की आपूर्ति रोक दी जा सकती थी। आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत की आत्मनिर्भरता की पहल इसी चक्र को तोड़ने के लिए बनी थी, और ऑपरेशन सिंदूर ने इस बदलाव का सबसे मजबूत प्रमाण दिया है।
समय का महत्व बहुत बड़ा है। भारत के रक्षा निर्यात के लक्ष्य 2016-17 में मात्र ₹1,500 करोड़ से बढ़कर हाल के वर्षों में ₹21,000 करोड़ से अधिक हो गए हैं। स्वदेशी प्रौद्योगिकि से बनी प्रणालियां — सटीक निर्देशित गोला-बारूद, ड्रोन, हवाई रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण — धीरे-धीरे परीक्षण से सीधे मोर्चे पर तैनात हो रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने इनमें से कई प्रणालियों को वास्तविक लड़ाई की परिस्थितियों में परखा, और महत्वपूर्ण बात यह है कि वे सफल रहीं।
राज्य मंत्री संजय सेठ ने क्या कहा और ऑपरेशन सिंदूर में क्या हुआ
प्रयागराज के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 'मेक इन इंडिया' हथियारों के प्रदर्शन के बारे में अब तक का सबसे सीधा आधिकारिक समर्थन दिया। उन्होंने सशस्त्र बलों की तारीफ की कि उन्होंने सटीकता से हमले किए, आतंकवादी अड्डों को नष्ट किया और यह सब स्वदेशी हथियारों से किया। उनकी बातें महज राजनीतिक दावे नहीं थीं — वे तैनात किए गए उपकरणों की व्यावहारिक प्रभावशीलता के साथ जुड़ी थीं।




