जापान में तबाही: 7.1 की तीव्रता से कांपी धरती.. शॉपिंग मॉल जमींदोज, सड़कों पर आई दरारें, चारों ओर मची चीख-पुकार!
जापान में एक बार फिर कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। मंगलवार की शाम दक्षिणी जापान का कुमामोटो प्रांत भीषण भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई। यह भूकंप इतना शक्तिशाली था कि कई इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और मुख्य सड़कें बीच से फट गईं। भूकंप आते ही पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर खुले मैदानों की ओर भागने लगे।
प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रभावित इलाकों के करीब 3 लाख लोगों को सुरक्षित शिविरों में जाने का निर्देश दिया है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन मलबे के नीचे दबे लोगों की संख्या को देखते हुए जान-माल के भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
शॉपिंग मॉल में बड़ा हादसा: धमाका और फिर मलबे का ढेर
इस भूकंप की सबसे दुखद खबर कुमामोटो के 'एऑन मॉल' (Aeon Mall) से आई है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, भूकंप के दौरान मॉल की दूसरी मंजिल पर एक जोरदार धमाका सुना गया, जिसके बाद इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस हादसे में कई लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
मॉल में काम करने वाले करीब 20 से 30 कर्मचारी अभी भी लापता हैं। दमकल विभाग की दर्जनों गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं और मलबे को हटाकर दबे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ऐतिहासिक कुमामोटो किले और सड़कों को नुकसान
भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ का प्रसिद्ध और ऐतिहासिक 'कुमामोटो किला' (Kumamoto Castle) भी क्षतिग्रस्त हो गया है। किले की बाहरी दीवारें गिर गई हैं और चारों ओर धूल का गुबार छा गया। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से किले को सैलानियों के लिए बंद कर दिया है।
परिवहन सेवाओं पर भी इस आपदा का गहरा असर पड़ा है। क्यूशू एक्सप्रेसवे पर सड़कें दो हिस्सों में बंट गई हैं, जिससे कई वाहन वहां फंस गए हैं। ट्रेन सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। कई घरों के गिरने और बिजली के खंभे उखड़ने से हजारों घरों की बत्ती गुल हो गई है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 50 लोग घायल हुए हैं और दर्जनों मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।
परमाणु संयंत्रों की स्थिति पर राहत भरी खबर
जापान जैसे देश में जब भी बड़ा भूकंप आता है, तो परमाणु संयंत्रों (Nuclear Plants) की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। 2011 की फुकुशिमा त्रासदी के बाद जापान ने अपने सुरक्षा मानकों को काफी कड़ा किया है। ताजा जानकारी के अनुसार, कुमामोटो के पास स्थित 'सेंदाई' और 'जेनकाई' परमाणु ऊर्जा केंद्रों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि रेडिएशन के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ है और सभी संयंत्र सुरक्षित हैं।
सरकार की त्वरित कार्रवाई
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है और बचाव कार्यों की कमान संभाली है। उन्होंने आपदा क्षेत्र में सेना (Self-Defense Forces) के 300 जवानों को भेजने का आदेश दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि "सरकार का पूरा ध्यान लोगों की जान बचाने और राहत कार्यों पर है।"
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले एक हफ्ते तक इसी तरह के तेज झटके और भूकंप आ सकते हैं। सुनामी की चेतावनी पहले जारी की गई थी, लेकिन स्थिति का आकलन करने के बाद उसे वापस ले लिया गया है।
जापान और भूकंप का रिश्ता
जापान दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। यह देश 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जहाँ कई टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में मिलती हैं। दुनिया में आने वाले 6.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों में से लगभग 20 प्रतिशत जापान में ही आते हैं। साल 2016 में भी कुमामोटो में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें करीब 300 लोगों की जान गई थी।
फिलहाल, कुमामोटो में बचाव दल मलबे में फंसे हर एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। शरणार्थी शिविरों में लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है। पूरी दुनिया इस संकट की घड़ी में जापान के साथ खड़ी है और वहां के लोगों के सुरक्षित होने की कामना कर रही है।




