तमिल साहित्य के दिग्गज और 'असुरन' जैसी सफल फिल्म को जन्म देने वाले लेखक पूमणि का मंगलवार को 79 साल की उम्र में निधन हो गया। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पूमणि ने अपने लेखन से आम लोगों के जीवन और संघर्षों को बड़े ही प्रामाणिक ढंग से दर्शाया। उनकी सबसे चर्चित कृति 'वेक्काई' थी, जिसे वेत्रिमारन ने फिल्म 'असुरन' में ढाला और धनुष ने मुख्य भूमिका निभाई। फिल्म की अपार सफलता के बाद पूमणि का काम देश-दुनिया के बड़े दर्शकों तक पहुंचा।
- साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता तमिल लेखक पूमणि का 79 वर्ष की आयु में निधन।
- उनके उपन्यास 'वेक्काई' पर आधारित थी सुपरहिट फिल्म 'असुरन', जिसने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
- पूमणि ने NFDC के लिए 'करुवेलम पूक्कल' फिल्म का निर्देशन भी किया था।
- उनका लेखन ग्रामीण जीवन और दलितों के संघर्षों पर केंद्रित रहा।
- लेखक और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
ग्राउंड से निकली कहानियों के उस्ताद थे पूमणि
पूमणि सिर्फ एक लेखक नहीं थे, वे अपनी कहानियों को जीते थे। उनकी लेखनी में गाँवों की मिट्टी की खुशबू थी, दलितों के दर्द की टीस थी और आम आदमी की ज़ुबान थी। 'वेक्काई' उपन्यास, जो बाद में 'असुरन' बना, सिर्फ एक बदला लेने की कहानी नहीं थी। यह जमीन, जाति और आत्मसम्मान की लड़ाई थी, जिसे उन्होंने बड़े ही सलीके से कागज़ पर उतारा। फिल्म बनने के बाद, उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'असुरन' को दलितों की जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने की कहानी है। यह सोच ही उनके लेखन की गहराई को बताती है।
उन्होंने केवल कल्पना के घोड़े नहीं दौड़ाए, बल्कि NFDC के लिए 'करुवेलम पूक्कल' जैसी फिल्म का निर्देशन भी किया। यह फिल्म भी ग्रामीण परिवेश और उसके यथार्थ को दर्शाती थी। उनका काम हमेशा उन आवाज़ों को मंच देता रहा, जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है। उनकी कहानियाँ पाठकों और फिल्म निर्माताओं को प्रेरित करती रहेंगी। पूमणि के निधन से तमिल साहित्य और फिल्म जगत ने एक ऐसा स्तंभ खो दिया है, जिसकी जगह भर पाना मुश्किल होगा। उनका जाना सिर्फ एक लेखक का जाना नहीं, बल्कि ज़मीन से जुड़ी कहानियों के एक युग का अंत है।
'असुरन' और पूमणि की अमर विरासत
अक्टूबर 2019 में रिलीज हुई 'असुरन' सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर हिट नहीं हुई, बल्कि इसने कई पुरस्कार भी जीते। धनुष की दमदार एक्टिंग और वेत्रिमारन का निर्देशन, पूमणि की कहानी के बिना अधूरा था। यह फिल्म भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर बन गई। यह फिल्म आज भी समाज में व्याप्त असमानताओं पर बहस छेड़ती है। पूमणि का काम, उनकी सोच, उनके लिखे शब्द अब भी ज़िंदा हैं और हमेशा रहेंगे। साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता होने के बावजूद, वह हमेशा खुद को एक कहानीकार मानते थे, जो अपने लोगों की दास्तान कहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूमणि कौन थे?
देखिए, पूमणि तमिल साहित्य के एक जाने-माने लेखक थे, जिन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह अपने उपन्यास 'वेक्काई' के लिए प्रसिद्ध थे, जिसे बाद में धनुष-स्टारर फिल्म 'असुरन' में रूपांतरित किया गया था।
उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति क्या है?
सीधी बात है, उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति उपन्यास 'वेक्काई' है। इसी पर साल 2019 में वेत्रिमारन ने सुपरहिट फिल्म 'असुरन' बनाई थी, जिसमें एक्टर धनुष ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
पूमणि का निधन कितनी उम्र में हुआ?
पूमणि का निधन 79 साल की उम्र में हुआ। उनके निधन से साहित्य जगत और फिल्म उद्योग में शोक की लहर है, जैसा कि Times of India की रिपोर्ट में बताया गया है।




