DMart ने अपनी ई-कॉमर्स शाखा, DMart Ready, को कई शहरों से चुपचाप समेट लिया है। यह कोई छोटी बात नहीं, बल्कि भारत के सबसे अनुशासित और लागत-प्रभावी रिटेलर के लिए एक बड़ा दांव है — खासकर तब, जब Zepto, Blinkit और Swiggy Instamart जैसी कंपनियाँ 10 मिनट में सामान पहुँचाने की होड़ में अरबों झोंक रही हैं। DMart ने शोर मचाए बिना यह फैसला लिया है, जो सिर्फ़ संख्याओं और अपने दशकों पुराने मॉडल पर भरोसे की बात करता है। कंपनी के सूत्रों के मुताबिक, जिन शहरों में ऑनलाइन कारोबार घाटे में चल रहा था, वहाँ से हाथ खींच लिए गए हैं।

मुख्य बातें
  • DMart ने अपनी ई-कॉमर्स शाखा DMart Ready को कई घाटे वाले शहरों से बाहर निकाला।
  • कंपनी ने 10 मिनट की 'क्विक कॉमर्स' डिलीवरी मॉडल से दूरी बनाई, जो Zepto और Blinkit का मुख्य आधार है।
  • DMart अपनी मूल 'कम लागत, ज़्यादा स्टोर' रणनीति पर लौट रहा है, जहाँ ग्राहकों को स्टोर पर आने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • यह फैसला दिखाता है कि पारंपरिक रिटेलर ऑनलाइन मुनाफ़ा कमाने में संघर्ष कर रहे हैं, जबकि क्विक कॉमर्स कंपनियाँ भारी डिस्काउंट दे रही हैं।
  • कंपनी का मानना है कि उसके बड़े स्टोर और डिस्काउंट अभी भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए काफ़ी हैं।
  • अब देखना यह है कि यह रणनीति क्विक कॉमर्स के बढ़ते दबाव के सामने कितनी कारगर साबित होगी।

DMart का यू-टर्न: ऑनलाइन दौड़ में धीमे, स्टोर पर ज़ोर

भारत के रिटेल मार्केट में DMart ने हमेशा अपने अनूठे 'कम लागत, रोज़ाना कम दाम' मॉडल से तहलका मचाया है। साल 2002 में मुंबई में पहला स्टोर खोलने के बाद से ही DMart ने विस्तार और मुनाफ़े का एक दुर्लभ संतुलन बनाए रखा है। लेकिन ऑनलाइन दुनिया की दौड़ में, जहाँ Zepto और Blinkit जैसे खिलाड़ी सिर्फ़ 10 मिनट में सामान पहुँचाने का वादा कर रहे हैं, DMart की धीमी गति और अब कुछ शहरों से ऑनलाइन निकासी, एक सवाल उठाती है। क्या यह रणनीति एक समझदार कदम है या बदलते बाज़ार के सामने एक मजबूर वापसी? कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने उन शहरों से ऑनलाइन कारोबार समेटा है, जहाँ लागत और राजस्व का संतुलन बिगड़ रहा था। हम सिर्फ़ ग्रोथ के लिए पैसे नहीं जलाएंगे।”

DMart की सोच साफ़ है: वे ग्राहक को अपने स्टोर तक खींच कर लाना चाहते हैं, क्योंकि वहीं उनके लिए सबसे ज़्यादा मार्जिन बचता है। ऑनलाइन डिलीवरी, खासकर 10 मिनट वाली, लॉजिस्टिक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भारी लागत डालती है। DMart ने इस होड़ में शामिल होने से साफ़ इनकार कर दिया है। यह एक बड़ा जुआ है, क्योंकि ग्राहक अब सुविधा को तरजीह दे रहे हैं। फिर भी, DMart का इतिहास बताता है कि वे सिर्फ़ संख्याएँ देखते हैं, शोर नहीं। उन्होंने हमेशा लंबी अवधि की रणनीति पर काम किया है।

क्विक कॉमर्स की चुनौती: क्या DMart का 'कम दाम' मंत्र काम आएगा?

Zepto ने अप्रैल 2021 में लॉन्च होने के बाद से ही क्विक कॉमर्स मार्केट में हलचल मचा दी है। Blinkit (पहले Grofers) और Swiggy Instamart भी पीछे नहीं हैं। ये कंपनियाँ ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी डिस्काउंट और सुपर-फास्ट डिलीवरी का वादा कर रही हैं। लेकिन इस सुविधा की अपनी कीमत है, जिसे ये कंपनियाँ फिलहाल निवेशकों के पैसों से भर रही हैं। दूसरी तरफ, DMart, जिसका अपना एक लॉयल ग्राहक वर्ग है, अभी भी अपने 'एवरीडे लो प्राइस' मॉडल पर अड़ा है।

वित्तीय वर्ष 2023 की चौथी तिमाही में, DMart की मूल कंपनी Avenue Supermarts Limited का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफ़िट ₹460.1 करोड़ था, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 8.3% ज़्यादा था। यह दिखाता है कि स्टोर-आधारित मॉडल अभी भी मज़बूत है। लेकिन ऑनलाइन सेक्टर में, जहां DMart Ready का कुल राजस्व Avenue Supermarts Limited के कुल राजस्व का सिर्फ़ एक छोटा हिस्सा है, वहाँ मुनाफ़ा कमाना मुश्किल साबित हो रहा है। ऐसे में, घाटे वाले शहरों से पीछे हटना एक रणनीतिक फैसला लगता है, ताकि कंपनी अपने मूल बिज़नेस पर ध्यान दे सके। यह दिखाता है कि ऑनलाइन रिटेल में सिर्फ़ बड़े नाम होने से काम नहीं चलता, मुनाफ़ा भी चाहिए।

भविष्य की राह: DMart की स्टोर-आधारित रणनीति कितनी टिकाऊ?

भारत में ई-कॉमर्स बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। KPMG की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स बाज़ार 2026 तक 200 बिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। ऐसे में, DMart का ऑनलाइन से पीछे हटना थोड़ा अजीब लग सकता है। लेकिन कंपनी की रणनीति स्पष्ट है: वे उन जगहों पर ध्यान केंद्रित करेंगे जहाँ वे प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। वे अपने स्टोर नेटवर्क को मजबूत करने और ऑनलाइन को इन-स्टोर अनुभव के पूरक के रूप में देखने में विश्वास रखते हैं, न कि एक स्टैंडअलोन मुनाफ़ा कमाने वाले चैनल के रूप में।

यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या DMart अपनी इस 'बैक-टू-बेसिक' रणनीति से क्विक कॉमर्स दिग्गजों की चुनौती का सामना कर पाता है। बाज़ार विशेषज्ञ रितु राज, जो भारतीय रिटेल सेक्टर को दशकों से कवर कर रहे हैं, कहते हैं, “DMart ने हमेशा दिखाया है कि वे अपनी शर्तों पर खेलते हैं। यह उनका एक और साहसिक कदम है। लेकिन ग्राहक अब बदल रहे हैं; सुविधा की मांग बढ़ रही है। DMart को एक संतुलन खोजना होगा।” आने वाले समय में, यह स्पष्ट होगा कि क्या DMart का धीरूभाई अंबानी वाला 'कम दाम' मंत्र आज के डिजिटल युग में भी उतना ही कारगर साबित होता है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

DMart ने अपनी ई-कॉमर्स शाखा को किन शहरों से समेटा है?

देखिए, DMart ने उन विशिष्ट शहरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जहाँ से उन्होंने DMart Ready को वापस लिया है। कंपनी ने बस इतना बताया है कि यह फैसला उन शहरों के लिए है जहाँ ऑनलाइन कारोबार घाटे में चल रहा था और अपेक्षित राजस्व उत्पन्न नहीं हो रहा था। यह एक रणनीतिक निर्णय है ताकि वे अपने मुख्य व्यवसाय और अधिक लाभदायक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

DMart ने 10 मिनट की क्विक कॉमर्स डिलीवरी क्यों नहीं अपनाई?

सीधी बात है, DMart का मॉडल हमेशा से 'कम लागत, रोज़ाना कम दाम' का रहा है। 10 मिनट की क्विक कॉमर्स डिलीवरी के लिए भारी लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और तीव्र संचालन की आवश्यकता होती है, जो लागत को बहुत बढ़ा देता है। DMart इस अतिरिक्त लागत को ग्राहकों पर थोपना नहीं चाहता और उनका मानना है कि यह उनके मूल मूल्य प्रस्ताव से मेल नहीं खाता। वे स्टोर-आधारित खरीदारी के अनुभव को प्राथमिकता देते हैं, जहाँ वे अपनी लागत को नियंत्रित कर सकते हैं।

क्या DMart की यह रणनीति क्विक कॉमर्स कंपनियों के सामने टिक पाएगी?

यह एक बड़ा सवाल है। DMart अपनी स्टोर-आधारित, कम लागत वाली रणनीति पर भरोसा कर रहा है, जो उन्हें दशकों से सफल बनाए हुए है। क्विक कॉमर्स कंपनियाँ सुविधा और गति पर दांव लगा रही हैं, भारी निवेश के साथ। DMart का मॉडल उन ग्राहकों के लिए आकर्षक रहेगा जो दाम को प्राथमिकता देते हैं और स्टोर पर जाकर खरीदारी करने में सहज हैं। हालांकि, जो ग्राहक सुविधा और तेज़ डिलीवरी चाहते हैं, वे क्विक कॉमर्स की ओर रुख कर सकते हैं। समय बताएगा कि भारत के विविध बाज़ार में कौन सी रणनीति लंबी दौड़ में सफल होती है।