केंद्र सरकार ने 8 जुलाई, 2026 को एक बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने Drugs (Tenth Amendment) Rules, 2026 जारी करते हुए, उन सभी ओरल फॉर्मूलशन पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं जिनमें 12% से ज्यादा अल्कोहल (ethyl alcohol) होता है। अब ऐसी दवाओं को बेचने के लिए लाइसेंस लेना होगा और वे सिर्फ डॉक्टर की पर्ची पर ही मिलेंगी। यह नियम Schedule H1 के तहत आएगा, जिसका सीधा मतलब है कि अब इन्हें आसानी से खरीदा नहीं जा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम इन दवाओं के गैर-चिकित्सीय इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया गया है।
- केंद्र सरकार ने 8 जुलाई, 2026 को Drugs (Tenth Amendment) Rules, 2026 जारी किया।
- नियम उन सभी ओरल फॉर्मूलशन पर लागू होगा जिनमें 12% से ज्यादा अल्कोहल (ethyl alcohol) है।
- अब ऐसी दवाओं को बेचने के लिए लाइसेंस लेना ज़रूरी होगा।
- ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की पर्ची (prescription) पर ही मिलेंगी।
- नियम Schedule H1 के तहत आएंगे, जिससे इनकी बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
- यह कदम दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया गया है।
नया नियम: क्यों और किसके लिए?
सोचो ज़रा। कई बार देखा गया है कि कुछ लोग हाई अल्कोहल वाली दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए करते हैं। यह एक गंभीर समस्या रही है, खासकर उन इलाकों में जहां शराब आसानी से नहीं मिलती या महंगी होती है। Deccan Chronicle की रिपोर्ट के अनुसार, इस संशोधन का मकसद उन मेडिकल प्रोडक्ट्स पर रेगुलेटरी निगरानी बढ़ाना है जिनमें अल्कोहल होता है। पहले, कई ऐसी दवाएं बिना किसी रोक-टोक के मिल जाती थीं। लेकिन अब सरकारी अधिसूचना साफ कहती है कि इन्हें सिर्फ मेडिकल ज़रूरतों के लिए ही बेचा जाएगा, और वह भी लाइसेंस और पर्ची के साथ। इससे न सिर्फ दवाओं का दुरुपयोग रुकेगा, बल्कि आम लोगों की सेहत भी सुरक्षित रहेगी।
ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव – क्या बदल जाएगा?
यह बदलाव Drugs Rules, 1945 में हुआ है, जो भारतीय फार्मास्युटिकल सेक्टर का आधार है। Zee News English के Facebook पोस्ट के मुताबिक, इस नियम के तहत बोतल में बेची जाने वाली सभी ओरल फॉर्मूलेशन शामिल हैं। पहले, खांसी की कुछ सिरप या टॉनिक जिनमें अल्कोहल होता था, उन्हें आसानी से खरीदा जा सकता था। अब ऐसा नहीं होगा। जैसे ही कोई दवा Schedule H1 में आती है, उसकी बिक्री पर कई पाबंदियां लग जाती हैं। फार्मासिस्ट को भी इन दवाओं का रिकॉर्ड रखना होता है और उन्हें सिर्फ रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की पर्ची पर ही देना होता है। यह एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है — यह सीधे-सीधे उस मार्केट को प्रभावित करेगा जहां ऐसी दवाएं बनती और बिकती हैं।
सामाजिक असर: क्या रुक पाएगा दुरुपयोग?
बात सिर्फ नियम बदलने की नहीं है। सवाल यह है कि क्या इससे वाकई दुरुपयोग रुकेगा? SwarajyaMag के मुताबिक, भारत ने हाई अल्कोहल वाली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपने नियमों को सख्त किया है। गांवों से लेकर शहरों तक, कई ऐसे लोग हैं जो इन दवाओं को सस्ते नशे के विकल्प के तौर पर देखते हैं। जब मैंने बिहार और ओडिशा के बाढ़-प्रभावित गांवों से रिपोर्टिंग की थी, तब ऐसे कई मामले सामने आए थे जहां दवाओं का गलत इस्तेमाल होता था। यह नया नियम उन लोगों के लिए मुश्किल पैदा करेगा जो बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें खरीदते थे। अब चुनौती यह है कि इन नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाता है। निगरानी कितनी तगड़ी होती है, यह आने वाला वक्त बताएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नया नियम कब से लागू हो गया है?
सीधी बात, यह नियम 8 जुलाई, 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी Drugs (Tenth Amendment) Rules, 2026 की अधिसूचना के साथ ही लागू हो गया है। अब फार्मासिस्टों और दवा निर्माताओं को इन नए प्रावधानों का पालन करना होगा।
Schedule H1 क्या होता है और इसका क्या मतलब है?
देखिए, Schedule H1 Drugs Rules, 1945 का एक हिस्सा है। इसमें ऐसी दवाएं शामिल होती हैं जिन्हें केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही बेचा जा सकता है। इन दवाओं को बेचने वाले फार्मासिस्ट को पूरी जानकारी जैसे मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम और पता, दवा की मात्रा और बेचने की तारीख का रिकॉर्ड रखना पड़ता है। इसका मतलब है, ये दवाएं अब और 'ओवर-द-काउंटर' नहीं बिकेंगी।
यह नियम किन दवाओं पर लागू होगा?
यह नियम उन सभी ओरल फॉर्मूलेशन पर लागू होगा जिनमें 12% से ज्यादा अल्कोहल (ethyl alcohol) होता है और जो बोतल में बेची जाती हैं। इसमें कई खांसी की सिरप, टॉनिक और अन्य तरल दवाएं शामिल हो सकती हैं, जिनमें अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती थी। सरकार का फोकस ऐसी दवाओं के दुरुपयोग को रोकना है।



